Holika Dahan

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Rs.1,500.00

होलिका दहन की बुकिंग में आप को एक पुजारी जी मिलेंगे। पूजा में लगने वाली सभी सामग्री जजमान को खुद व्यवस्थित करनी होगी। या फिर आप पूजा सामग्री को (होलिका दहन पूजा सामग्री किट) इस लिंक पर क्लिक कर के बुक भी कर सकते हैं।

Holika Dahan Timing 2020 = 18:47 to 21:11

Duration = 02 Hours 25 Mins
Bhadra Punchha = 09:37 to 10:38
Bhadra Mukha = 10:38 to 12:19

Rangwali Holi on 10th, March

Purnima Tithi Begins = 03:03 on 09/Mar/2020
Purnima Tithi Ends = 23:17 on 09/Mar/2020

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Description

इस वर्ष 2020 की  होली पर बना है 3 ग्रहों का बहुत शुभ संयोग, श्रेष्ठ मुहूर्त में ही करें होली का पूजन, मिलेंगे शुभ वरदान—

रंगों का पर्व होली इस वर्ष (सोमवार) 10 मार्च 2020 को मनाया जाएगा। इससे एक दिन पूर्व 09 मार्च को होलिका दहन होगा। होलिका दहन पर इस बार दुर्लभ संयोग बन रहे हैं।


होलिका दहन की पूजा में रक्षो रक्षोघ्न सूक्त का पाठ होता है। तीन बार परिक्रमा की जाती है। लोग गेहूं,चना व पुआ-पकवान अर्पित करते हैं। सुबह उसमें आलू, हरा चना पकाते और खाते हैं। नहा धोकर शाम में मंदिर के पास जुटते हैं। नए कपड़े पहनकर भगवान को रंग-अबीर चढ़ाते हैं। भस्म सौभाग्य व ऐश्वर्य देने वाली होती है। होलिका दहन में जौ व गेहूं के पौधे डालते हैं। फिर शरीर में ऊबटन लगाकर उसके अंश भी डालते हैं। ऐसा करने से जीवन में आरोग्यता और सुख समृद्धि आती है।

प्राचीन पर्वों की यही सुंदरता है कि इनके पीछे छुपे पौराणिक राज हमें आकर्षित करते हैं। होलिका दहन का पर्व संदेश देता है कि ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं।

होलिका दहन, होली त्योहार का पहला दिन, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंगों से खेलने की परंपरा है जिसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि आदि नामों से भी जाना जाता है। होली बुराई पर अच्छाई की विजय के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। होलिका दहन (जिसे छोटी होली भी कहते हैं) के अगले दिन पूर्ण हर्षोल्लास के साथ रंग खेलने का विधान है और अबीर-गुलाल आदि एक-दूसरे को लगाकर व गले मिलकर इस पर्व को मनाया जाता है।

होलिका दहन का शास्त्रों के अनुसार नियम

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक होलाष्टक माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। पूर्णिमा के दिन होलिका-दहन किया जाता है। इसके लिए मुख्यतः दो नियम ध्यान में रखने चाहिए –

1. पहला, उस दिन ‘भद्रा’ न हो। भद्रा का दूसरा नाम विष्टि करण भी है, जो कि 11 करणों में से एक है। एक करण तिथि के आधे भाग के बराबर होता है।

होलिका दहन की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय विष्णु भगवान के किसी अन्य को नहीं भजता, तो वह क्रुद्ध हो उठा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुक़सान नहीं पहुंचा सकती। किन्तु हुआ इसके ठीक विपरीत, होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ। इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है। होली का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं।होली की केवल यही नहीं बल्कि और भी कई कहानियां प्रचलित है।

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