योगिनी एकादशी 2020 : हिंदू धर्म में एकादशी की काफी महिमा मानी गई है। योगिनी एकादशी का व्रत अषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं और कथा का पाठ करते हैं। इस व्रत कथा के बिना एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।

एकादशी का महत्व

18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य नाम का अध्याय है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने सालभर की सभी एकादशियों का महत्व युधिष्ठिर को बताया है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस एकादशी पर व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए।

योगिनी एकादशी व्रत कथा:

पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वर्ग की अलकापुरी नगरी में कुबेर नामक एक राजा रहता था। कुबेर भगवान शिव का भक्त था। वो हर दिन भोलेनाथ की पूजा करता था। राजा की पूजा के लिए हेम नामक एक माली फूल लाता था। हेम माली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था, जो एक अत्यंत सुंदर स्त्री थी।

फिर एक दिन माली सरोवर से पुष्प तो ले आया लेकिन कामातुर होने की वजह से अपनी पत्नी से हास्य-विनोद करने में व्यस्त हो गया और राजमहल नहीं गया। दूसरी तरफ राजा माली का दोपहर तक इंतजार करता रहा। इसके बाद राजा कुबेर ने सैनिकों को आदेश दिया कि जाओ माली अब तक क्यों नहीं आया, इसका पता करो। सैनिकों ने लौटकर राजा को बताया कि माली बहुत पापी और अतिकामी है।

वो अपनी पत्नी के साथ हास्य-विनोद में लगा है। ये सुनकर राजा कुबेर क्रोधित हो गए और माली को तुरंत उपस्थित करने का आदेश दिया।
इसके पश्चात हेम माली राजा डर के मारे से कांपता हुआ राजा के पास आया। राजा कुबेर ने माली श्राप देते हुए कहा, ‘अरे नीच! पापी! कामी! तूने देवों के देव महादेव का अनादर किया है। मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू पत्नी के वियोग में तड़पेगा। मृत्युलोक में जाकर तू कोढ़ी हो जाएगा।’

फिर मृत्युलोक में आकर हेम माली ने बहुत सारे कष्ट सहे। एक बार तो भयानक जंगल में जाकर बिना अन्न और जल के हेम माली भटकता रहा। फिर वह ऋषि मार्कण्डेय के आश्रम में जा पहुंचा। उसने ऋषि को अपनी कहानी बताई। ऋषि ये सुनकर बोले- तूने मुझे सत्य बात बताई है, इसीलिए मैं तुम्हे उद्धार के लिए एक व्रत बता रहा हूं, अगर तुम योगिनी एकादशी का विधि-विधान से व्रत करोगे तो सभी पापों का विनाश हो जाएगा।

ये सुनकर माली ने ऋषि को प्रणाम किया और विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत रखा। फलस्वरूप हेम माली दोबारा स्वर्ग गया और अपनी पत्नी के साथ सुख से रहने लगा।

भगवान विष्णु की पूजा करें

एकादशी पर सबसे पहले गणेशजी की पूजा करें। इसके बाद भगवान विष्णु का लक्ष्मीजी के साथ पूजन करें। अभिषेक करें। पूजन में फल-फूल, गंगाजल, धूप दीप और प्रसाद आदि अर्पित करें। दिन में एक समय फलाहार करें। रात में भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं। मंत्रों का जाप करें। अगले दिन यानी 18 जून, द्वादशी तिथि पर किसी जरूरतमंद को दान-दक्षिणा दें।

ऐसे करें गणेश पूजा

गणेशजी को दूर्वा की 21 गांठ चढ़ाएं और श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें। गणेशजी की पूजा गजानंद के रूप में की जाती है। इसीलिए किसी हाथी को गन्ना खिलाएं। गणेशजी के साथ ही रिद्धि-सिद्धि की भी पूजा करें। इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

सूर्यास्त के बाद करें तुलसी पूजा

एकादशी पर भगवान विष्णु, महालक्ष्मी के अलावा तुलसी पूजा करने का भी विधान है। इस तिथि पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें इस दौरान तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

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